पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान
जिस तरह से हमारे पूर्वजों ने हमे एक स्वच्छ पृथ्वी तथा शुध्द वातावरण दिया है उसी प्रकार से हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम भी आने वाले पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पृथ्वी तथा शुद्ध पर्यावरण को प्रदान करे, ये हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनता है।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को हमारे प्राचीन ऋषियों मुनियों ने गंभीरता से समझा इसलिए उन्होंने यज्ञ की सुष्ट की थी यज्ञों मे प्रयुक्त घी, तिल आदि के कारण वातावरण शुद्ध रहता था।
प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना, पर्यावरण को किसी भी प्रकार से दूषित नही होने देना, देश का नाम सर्वपल्ली रखा, तथा प्रकृति के साथ लोगों का तालमेल बैठने के लिए जागरूकता फैलना हमारे प्राचीन लोगों का व्यवस्था रहा।
हमने अपने पर्यावरण के लिए क्या किया –
पिछले दशकों के लोगों ने जितना पर्यावरण को नुसकान नही पहुँचाया, हमने उससे कही अधिक 50 सालों के अंदर ही पर्यावरण का नुसकान पहुचाया है।
पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण – हम सब की जीवन शैली, खुशहाली, तथा अशिक्षित होना जैसे तथ्य शामिल है ।
यदि समय रहते हम सब अपनी जीवन शैली को कंट्रोल तथा संसाधनों का उपयोग बिना समझे करते रहेंगे तो शायद एक बार फिर से पृथ्वी पर आने वाला महाविनाश महाघातक सिद्ध होगा,
अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था – “हम प्रकृति को तब तक नही समझ सकते जब तक हम इसे सम्मान और प्रेम से नही देखेंगे”।
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प्रस्तावना
मानव और पृथ्वी के बीच एक घनिष्ट संबंध है, क्योंकि स्वच्छ वातावरण मे ही जीवन का विकास संभव है। और यदि वातावरण मे कुछ हानिकारक तत्व आ जाते है तो वातावरण को दूषित कर देते है. यह गंदा वातावरण जीवधारियों के लिए अनेक प्रकार से हानिकारक सिद्ध होता है। इस प्रकार वातावरण के दूषित हो जाने को ही प्रदूषण कहते है।
विश्व मे प्रदूषण इस प्रकार से बढ़ते जा रहा है की आने वाले कुछ सालों के अंदर ही पृथ्वी नष्ट होती दिखेगी, तथा संसाधनों की कमी मानव सभ्यता का अंत का कारण बन सकता है.
दिन प्रतिदिन हम लोगों की क्रियाए वातावरण को दूषित करती जा रही है। यह पर्यावरण प्रदूषण केवल हमारे लिए ही समस्या ही नही बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा बनती जा रही है।
हम इस आकड़ों से समझ सकते है की जब इस समय पर्यावरण प्रदूषण के कारण तापमान मे लगातार वृद्धि होती जा रही है, तो आने वाले समय मे तापमान क्या होगा ?
“2001 मे तापमान – लगभग 25 डिग्री ।
2005 मे तापमानलगभग – 25.2 डिग्री ।
2010 के दौरान तापमान 25.3 डिग्री पहुँच गया ।
2024 मे यह आकडा 25.65 डिग्री हो गया चुका है।
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प्रदूषण के प्रकार –
प्रदूषण को हम कोई विशेष प्रकार नही दे सकते है, लेकिन वैज्ञानिकों ने कुछ तरह के प्रकार को दर्शाया है जो इस प्रकार से है –
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वायु प्रदूषण
वायुमंडल मे विभिन्न प्रकार की गैस एक विशेष अनुपात मे उपस्थित रहती है। जीवधारी अपनी क्रियाओ द्वारा आक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते रहते है, हरे पौधे प्रकाश की उपस्थिति मे कार्बन डाई आक्साइड लेकर ऑक्सीजन छोड़ते रहते है। तथा मानव आक्सीजन लेकर कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते है। इस प्रकार से वातावरण मे ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड का संतुलन बना रहता है,
जीवधारियों तथा पौधों के बीच घनिष्ट संबंध होता है लेकिन मानव अपने अज्ञानवश और आवश्यकता के नाम पर इस संतुलन को नष्ट करता जा रहा है।
वाहनों, चिमनियों, ईट के भट्टे, पटाखे, आदि के द्वारा निकला हानिकारक गैसें वायुमंडल मे co2 की मात्रा बढ़ा रही है। co2 एक हानिकारक गैस है इसका स्तर अधिक होने से साँस लेमे मे परेशानी, सिरदर्द, तथा हृदय और मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है, co2 तापमान मे वृद्धि लगातार होती जा रही है।
यह भी जाने – एक पेड़ अपने जीवन मे -लगभग 10 से 22 किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करता है तथा लगभग 118 किलोग्राम ऑक्सीजन छोड़ता है।
मानव एक दिन मे 0.5 किलोग्राम ऑक्सीजन ग्रहण करता है तथा 0.4 किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ता है। |
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जल प्रदूषण
हम सभी के लिए जल बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक है सम्पूर्ण पृथ्वी पर लगभग 70 प्रतिशत जल है तथा लगभग 30 प्रतिशत भू भाग पाया जाता है।
70 प्रतिशत जल मे केवल 0.3 प्रतिशत भूमिगत जल स्रोत उपलब्ध है, जो पीने के लिए उपयुक्त है। बाकी शेष 97.5% समुद्री तथा 0.01% वायुमंडली जल है जो पीने योग्य बिल्कुल नही है।
बढ़ती हुई आबादी के द्वारा जल का इस प्रकार उपभोग किए जा रहे है की आने वाले समय मे जल की कमी एक विशेष समस्या बन सकती है।
समुद्र, नदियों तालाबों मे कारखानों वा अद्योगिक केंद के द्वारा फेके गए हानिकारक तत्त्व जो जल प्रदूषण का मुख्य कारण है
नोट : अंटार्कटिका महाद्वीप के ग्लेशियल का पिघलना जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा दे रहा है जो मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकती है।
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ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण आज की एक नई समस्या है। मोटर, कर, टैक्टर, जेट विमान कारखानों, लाउडस्पीकर आदि ध्वनि के संतुलन को बिगाड़कर ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न कर रहे है।
तेज ध्वनि से श्रवण शक्ति का नुकसान हो सकता है और कार्य करने की क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
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रासायनिक प्रदूषण
रासायनिक प्रदूषण मानव स्वास्थ्य, वनस्पति, पशु जीवन वा पर्यावरण के अन्य घटकों पर प्रभाव डालता है।
इस प्रदूषण का प्रमुख श्रोत
उर्वरक, कीटनाशक दवाइया, खरपतवार, प्लास्टिक, विषैले पदार्थ जो कारखानों वा अद्योगिक केंद्रों से निकलने वाले विषैले पदार्थ इस प्रदूषण के प्रमुख घटक है।
इस प्रदूषण से पीने योग्य जल का दूषित होना, मिट्टी की उर्वरकता मे कमी जिससे फसलों पर प्रभाव आना (भारत मे 20 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुआ) मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव आदि समस्याए इस प्रदूषण के उत्पन्न हो रहे है।
प्रदूषण के प्रमुख कारण
- पर्यावरण प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण विश्व मे जनसंख्या मे तेजी से होनी वाली वृद्धि है। बढ़ती हुई आबादी से संसाधनों मे कमी क्योंकि संसाधन सीमित है ।
- विज्ञान का आविष्कार जहा मानव जाति के लिए वरदान स्वरूप सिद्ध हुए है, वही उनसे पर्यावरण का भयंकर अहित भी हुआ है। विज्ञान ने विभिन्न प्रकार के मशीनों का निर्माण किया है, तथा इन मशीनों को चलने के लिए ईधन के रूप मे पेट्रोल, डीजल, कोयला, लकड़ी तेल आदि का उपयोग होता है, ये ईधन वायु पर्यावरण को इस प्रकार से दूषित कर रहे है को ओज़ोन परत मे समस्या खड़ी होती जा रही है।
- पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख जिम्मेदार हम लोगों की लाइफ स्टाइल और खुशहाली से भी जुड़ा है। हमारी खुश हाली आने वाले समय के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
- हम लोगों की लाइफ स्टाइल के कारण पेड़ों की कटाई जोरों से होने के कारण पशु पक्षियों की आवास का हनन और उनके जीवन का अंत, तथा प्रकृति मे असंतुलन बढ़ते जा रहा है।
पर्यावरण प्रदूषण के रोकथाम के उपाय
- क्या केवल पेड़ लगाने से, कुछ बल्ब कम जलाने से, दो वाहनों के स्थान पर एक वाहनों के प्रयोग से क्या पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सकता है।
- दुनिया मे जितना 95 प्रतिशत मध्यम वर्ग लोग पर्यावरण को प्रभवित करते है उससे कही ज्यादा 5 प्रतिशत उच्च स्थानों के लोग पर्यावरण को नुसकान पहुचते है।
- यदि हमे पर्यावरण प्रदूषण का समाधान निकालना है तो
- प्रतिज्ञा लेना होगा की – देश का नागरिक वही कहलता है जो देश की पर्यावरण को दूषित न होने दे और अपने देश को प्रदूषित मुक्त करे ।
- बढ़ती हुई जनसंख्या पर नियंत्रण के प्रति लोगों को जागरूक करना ।
- वृक्षारोहड़ पर विशेष ध्यान देना ।
- त्यौहारों पर विशेष रूप से होली मे जल का उपयोग कम करना ।
- जंगलों का संरक्षण”, “सौर ऊर्जा का प्रयोग” या “जल पुनर्चक्रण” पर ध्यान देना ।
उपसंहार
उपयुक्त उपाओ से हम काफी हद तक वातावरण को शुद्ध बनाने की कोशिश कर सकते है । पर्यावरण प्रदूषण की समस्या सारे विश्व मे है, विशेष रूप से भारत मे इसकी समस्या वातावरण के प्रति जागरूक न होने के कारण बढ़ती जा रही है।
इस महाविनाश को टालने के लिए हम लोगों के पास मात्र 5 वर्ष का समय है इस महाविनाश के प्रमुख उदाहरण असम, हिमांचल मे आई बाढ़, समुद्रों के जल का बढ़ना, फसल बर्बाद होना, उत्तर भारत मे भीषण गर्मी इत्यादि इस आने वाले महाविनाश की चेतावनी है।
यही समय है की हम पर्यावरण के प्रति खुद जागरूक बने तथा जागरूकता फैलाए ।
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