-विज्ञान वरदान है या अभिशाप-
दोस्तों विज्ञान जितना हम सब को समृद्ध बनाया है उतना ही खरता बनाता जा रहा है यानि विज्ञान हमारे लिए वरदान और अभिशाप दोनों है।
विज्ञान क्या है
विज्ञान – वि + ज्ञान, इन शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है –
विशेष प्रकार का ज्ञान ।
एक दौर था जब दादा जी अपनी यात्रा साईकल या पैदल, खेतों की जुताई हलो की मदद से किया करते थे, उनका ताकत और साहस अलग ही लेवल का था ।
आज हम सब के दौर मे यात्रा – कार, रेल, वायुयान के माध्यम से हो रहा है।
साईकल या पैदल के दौर से लेकर – कार, रेल, मोबाइल फोन, इत्यादि वस्तुओ का आना एवं मानव जीवन के कार्यों को सुनहरा संसार मे बदलने की क्रिया विज्ञान की देन है।
प्रस्तावना
विज्ञान की शुरुवात कहा से हुई ये निश्चित नही है, क्योंकि प्राचीन सभ्यताओ ( जैसे हड़प्पा, मिश्र, मेसोपोटामिया) मे भी विज्ञान का प्रचलन था।
चुकी अद्योगिक क्रांति के बाद विज्ञान को एक नया रूप प्रदान किया गया ।
जैसे – सबसे पहले भाप इंजन, कपड़ा उद्योग, एवं अन्य प्रकार की फैक्ट्रियों को बढ़वा मिला । उसके बाद बिजली का आविष्कार, पेट्रोलियम एवं अन्य नई मशीन, रेलवे, मोटर गड़िया का दौर प्रारंभ हुया।
आज के समय मे विज्ञान सर्व व्यापी हो चुका है। मानव जीवन का कोई ऐसा कोना या क्षेत्र नही जहा विज्ञान न पहुचा हो ।
लोगों की जिज्ञासा ने विज्ञान को उचाइयों तक पहुचा दिया है की हम ब्रह्मांड की रहस्यपूर्ण जानकारी भी प्राप्त करते जा रहे है।
हालकी विज्ञान ने हमे बहुत कुछ दिया है, लेकिन विज्ञान ने हमसे बहुत कुछ छिन भी लिया है, हमारा पर्यावरण, हमारी कला व संस्कृति, लोगों की आत्मनिर्भरता ।
विज्ञान के विकास का क्रम
मानव की जिज्ञासा से विज्ञान के कदम बढ़ते है। विज्ञान का विकास प्राचीन कल से चला आ रहा है जब लोगों ने प्रकृति को सोचना वा समझना शुरू किया ।
- जैसे – मेसोपोटामिया की सभ्यता मे खगोल विज्ञान, समय मापन की शुरुवात हुआ ।
- भारत मे – हड़प्पा सभ्यता की तकनीकी आज के विज्ञान से मेल खाती है।
- गणित, चिकित्सा, योग विज्ञान, खगोल विज्ञान, जैसे विषयों पर भारत के प्राचीन वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण योगदान किया है ।
- जैसे – आर्यभट्ट, चरक, चाणक्य, महर्षि पतंजलि आदि ।
- यूनान के प्रमुख दार्शनिक जैसे प्लेटों, अरस्तू, पाईथगोरस आदि ने विज्ञान को विकसित करने का प्रयास किया ।
- 1760 की अद्योगिक क्रांति विज्ञान के क्षेत्र मे परिवर्तनकारी सिद्ध हुआ । आज के विज्ञान के विकास को यदि समझना चाहे तो चंद्रयान 3 इसका उदाहरण है ।
विज्ञान वरदान है –
आधुनिक विज्ञान ने मानव सेवा के लिए अनेक प्रकार के साधन को विकसित कर लिया है।
जिस प्रकार अलादीन के चिराग से निकलता दैत्य हर काम को आसानी से कर देता था, इसी प्रकार विज्ञान भी बड़ी सरलता से कर देता है।
पलभल के समय मे एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना, शत्रु के नगरों को मिनटों मे बर्बाद कर देना जैसे कार्य विज्ञान की देन है।
विज्ञान मानव जीवन के लिए वरदान सिध्द हुआ है। इसकी देन मानव को निम्न सुख समृद्धि प्रदान करता जा रहा है।
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परिवहन के क्षेत्र मे –
रेल, वायुयान, जल मार्ग एवं पृथ्वी ही नही बल्कि विज्ञान इतना वरदान साबित हो गया है। की वह अन्य ग्रहों पर पर्यटन करवा सकता है।
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संचार के क्षेत्रों मे
टेलीफोन, टेलीग्राम, टेलीप्रिंटेर, मोबाईल फोन, इंटरनेट आदि द्वारा विश्व मे क्षण भर के अंतर्गत ही संदेशों को आदान प्रदान किया जा सकता है।
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औद्योगिक क्षेत्र मे
भारी मशीनों के निर्माण मे बड़े बड़े कारखानों को जन्म दिया है विज्ञान की तकनीकी से हजारों लोगों का कार्य ai रोबोट जैसे बड़े बड़े मशीनों के माध्यम से हो रहे है।
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कृषि क्षेत्र मे
ट्रैक्टर, टइब्यूलमशीन, रासायनिक खाद एवं बीजों के नई नई किस्मों ने कृषि उत्पादन को बहुत बढ़ाया ।
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चिकित्सा के क्षेत्र मे
चिकित्सा के क्षेत्र मे तो विज्ञान वास्तव मे वरदान सिद्ध हुआ है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति इतनी विकसित हो गई की अन्धो को आंखे और अपंग को अंग मिलन अब असंभव नही लगता ।
अन्य कई क्षेत्र जहा विज्ञान वरदान सिद्ध हुआ है ।
विज्ञान अभिशाप
विज्ञान जितना हमे सुख समृद्धि प्रदान करता है, उससे ज्यादा हम सब के समक्ष समस्या की दीवाल बनके भी खड़ा हो जाता है। इसलिए विज्ञान को द्विधारी तलवार की संज्ञा भी दिया जाता है।
विज्ञान अभिशाप के कई रूप है–
- एक जो विध्वंसकारी अस्त्र शस्त्रों से संबंधित है। टैंक राकेट बम, परमाणु बम, हाइड्रोजन बम, आदि ऐसे अस्त्र है जो पलक झपकते ही लाखों जीवों का संहार कर सकते है।
- जीव ही नही बल्कि पृथ्वी को भी बर्बाद कर सकते है।
- इन बमों के विस्फोट से वायुमंडल भी दूषित होना एक आम होता जा रहा है ।
- विज्ञान अभिशाप के अप्रत्यक्ष रूप के अनर्गत कला और संस्कृति का हास होता है।
- वैज्ञानिक आविष्कारों की बदौलत अनेक प्रकार की मशीन तैयार हुई यही जो कम व्यव थोड़े श्रम और अल्प समय मे अधिक से अधिक मात्रा मे वस्तुओ को तैयार कर देती है।
- इस प्रकार श्रमिक की निजी कला का हास हो जाता है उनकी रोजी रोटी पर भी अप्रत्यक्ष हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
इस प्रकार से हम कह सकते है की विज्ञान अभिशाप
उपसंहार
विज्ञान हम सब के लिए द्विधारी तलवार है, एक तरफ हमे ये अंतरिक्ष का सैर करवाता है तो दूसरी तरफ हमारे पर्यवारण को भी प्रदूषित कर देता है। यदि मनुष्य की मानसिकता सही दिशा मे काम करे तो विज्ञान हमरे लिए वरदान साबित हो सकता है।
लेकिन यदि इसका प्रयोग सही दिशा मे मनुष्य नही करता, तो जाहीर है की विज्ञान से उठा विनाश को अभिशाप ही समझा जाएगा । ।
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