Class 6 History Chapter 2 Notes
पृथ्वी पर मानव के जीवन का इतिहास एक रोमांचक यात्रा रही है, इस अध्याय “Class 6 History Chapter 2 Notes ( आखेट खाद्य संग्रह से भोजन उत्पादन तक” )मे यह जानने का प्रयास करंगे कि शुरुवाती मानव जो आखेटक (शिकार) एवं खाद्य संग्रह किया करते थे, वे किस प्रकार से कृषि और पशुपालन एवं इसके साथ साथ औजारों का निर्माण इत्यादि कला को सीखा ? चूंकि पिछला अध्याय 1 (क्या कब कहा और कैसे ) मे हमने अपने अतीत के इतिहास को जानने एवं समझने का प्रयास किया ।
सोचिए 15 लाख वर्ष पूर्व लोगों का जीवन कैसा रहा होगा ?
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जब उन्हे कृषि एवं पशुपालन के बारे मे जानकारी नही थी ।
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वे लोग क्या खाते होंगे ?
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एवं कहा रहते थे ?
मानव का प्रारम्भिक काल का मतलब या अर्थ कि जब मानव का निवास स्थान गुफा, झील, नदियाँ, हुआ करता था एवं भोजन कंद – मूल फल, कच्चा माँस, होता था ।
एक नवीन शैली का मतलब या अर्थ कि जब आरंभिक मानव जिसका निवास स्थान मुख्यतः गुफाओ मे होता है एवं भोजन , माँस, कंद मूल, इत्यादि हुआ करता था । लेकिन समय के अनुसार धीरे धीरे विकसित होता गया जैसे — उसने आग जलाने की कला को सिख लिया , भोज्य पदार्थों को इकट्टा करके रखना, कृषि, पशुपालन इत्यादि बदलाओ को जान या सीख लेना, इस प्रकार से मानव विकास के विकसित होने को एक नवीन शैली कहा गया ।
पाषाण कल (Stone age )
पाषाण युग प्रागैतिहासिक काल का एक महत्वपूर्ण भाग है जो लगभग 2.6 मिलियन वर्ष पूर्व से 10,000 वर्ष पूर्व तक फैला है। पाषाण का अर्थ – वह समय (2.6 मिलियन वर्ष पूर्व ) जब मनुष्य पत्थर के औजारों का प्रयोग करता था । —- “लोगों के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थर के औजारों और जलवायु परिवर्तन की प्रकृति के अनुसार पाषाण काल को निम्न तीन चरणों मे विभाजित किया है” –
1.पूरापाषाण काल (20 लाख वर्ष पूर्व से 12,000 वर्ष पूर्व)
- इस युग (20 लाख साल पहले) में मानव गुफाओं में निवास करता था ।
- भोजन के लिए शिकार, कंद मूल फल खाता था एवं खाद्य संग्रह भी करता था ।
- शिकार व अन्य कार्यों के लिए पत्थर के औजारों का निर्माण एवं उपयोग करता था ।
- इस युग की सबसे महत्वपूर्ण खोज आग की थी , जो मानव जीवन को बेहतर बनाने का मोड़ बना ।
- इस युग के प्रमुख स्थल
- भीमबेटका (मध्य प्रदेश ) – इस स्थान मे पूरापाषाण कालीन चित्र मिले है ।
- कुरनूल गुफा (आंध्र प्रदेश ) – इस क्षेत्र से राख के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
- बेलन (उत्तर प्रदेश) एवं दीदवाना (राजस्थान) – इस क्षेत्र से पूरापाषाण युगीन औजार प्राप्त हुए हैं ।
“यह भी जानें”
अब तक पूरापाषाण काल के 566 स्थल हमें भारत में प्राप्त हुए हैं।
2.मध्य पाषाण काल : (12,000 वर्ष पूर्व से 10,000 वर्ष पूर्व तक)
इस युग में विशेष रूप से लोग शिकार करते, मछली पकड़ते और भोजन एकत्र किया करते थे । एवं बाद के चरण में वे कृषि एवं पशुपालन करने की नीव भी रखी ।
इसी काल मे मनुष्यों ने कुत्तों व अन्य जानवरों को पालतू बनाना प्रारंभ किया ।
- इस युग के प्रमुख स्थल जहा से मध्य पाषाण युग के साक्ष्य प्राप्त हुए –
आदमगढ़ (मध्य प्रदेश)
बगोर (राजस्थान)
3. नव पाषाण युग (10,000 साल पहले से 4,500 साल पहले तक )
यद्यपि मध्य पाषाण युग मे लोगों के द्वारा कृषि एवं पशुपालन की शुरुवात की गई, लेकिन नव पाषाण युग मे मनुष्यों ने पूर्ण रूप से कृषि, पशुपालन को अपनाया गया एवं इसके साथ पकी हुई ईटों से घरों का निर्माण करना जैसे कलाओ के बारे मे मनुष्य ने सिख लिया ।
इसके अलावा मिट्टी के बर्तन बनाना तथा उसे रंगना , शवों को दफनाने की प्रक्रिया, कपड़े बनाकर पहनना , वस्तुओ का विनिमय करना भी प्रारंभ कर दिया था ।
इस युग के प्रमुख स्थल –
मेहरगढ़ (पाकिस्तान ) – भारतीय उपमहाद्वीप का एकमात्र प्रमुख स्थल मेहरग़ढ़ है, जो पाकिस्तान के एक प्रांत बलूचिस्तान मे स्थित है। इस क्षेत्र से मुख्यतः कृषि (गेंहू और जौ के अवशेष) , गड्डे वाले मकान देखने को मिलता है ।
बुर्जहोम (कश्मीर, भारत ) – शवों को दफनाने के साक्ष्य प्राप्त हुए है
आरंभिक मानव – ( पूरापाषाण काल )
पृथ्वी पर मानव का विकास कई चरणों मे हुआ हैं । जिसमे सर्वप्रथम होमोनिडस नामक मनुष्य जो 60 लाख वर्ष पूर्व दक्षिणी पूर्वी अफ्रीका मे रहा करते थे । उसके बाद होमो हाबिलिस नामक मनुष्य जो 20 लाख वर्ष पहले विकसित हुआ , एवं इसके फलस्वरूप होमो इरेक्टस प्राणी का उद्भव हुआ । सबसे अंतिम मानव का विकास जो हमारी प्रजाति है उसे होमो सेपियन्स प्राणी कहा जाता है । जिसका अर्थ है – “बुद्धिमान व्यक्ति”
आरंभिक मानव का जीवन
ये लोग पूरी तरह से शिकार, कंद मूल फल, एवं भोजन संग्रह पर निर्भर थे । भोजन की तलास मे ये मानव एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमा करते थे । इसलिए इन्हे आखेट खाद्य संग्रह के नाम से भी जाना जाता है।
इनका मुख्य निवास – नदियों, झीलों के आस पास एवं गुफाओ मे होता था । गुफाओ मे इन लोगों के द्वारा कई प्रकार के चित्र दर्शाए गए है ।
नोट — भारत के मध्य प्रदेश में स्थित भीमबेटिका मे स्थित गुफा में लगभग 30000 साल पुरानी चित्रकलाए मिली है। जिन्हे हम आज भी देखा जा सकता है ।
आरंभिक मानव के बारे मे जानकारी कैसे प्राप्त होती है ?
आपके मन मे जरूर यह प्रश्न आ रहा होगा हमे आज से बीस लाख साल पहले के लोगों के बारे मे (जिन्हे हम आखेटक खाद्य”संग्रहक” के नाम से जानते है) कैसे पता चलता है? क्योंकि उस समय मे इंटरनेट का दौर तो था नही ।
- पुरातत्वविदों को कुछ ऐसी वस्तुए प्राप्त हुई है जिसका निर्माण एवं उपयोग आखेटक खाद्य”संग्रहक” किया करते थे।
- जैसे – पत्थर के औजार, पशुओ की हड्डीया, चित्र आदि
- पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान प्राप्त प्रमुख वस्तुए – पुराने औजार, गुफाओ मे निर्मित चित्र (जैसे पक्षियों और पशुओ ) ।
आग की खोज
आग की खोज मानव के इतिहास का सबसे अत्यधिक क्रांति मे से एक है, आखेटक खाद्य “संग्रहक” समुदाय के लोगों का जीवन मे परिवर्तन आना, आग की खोज के फलस्वरूप हो सका ।
भारत के आंध्र प्रदेश मे स्थित कुरनूल गुफा मे राख के अवशेष मिले है, वैज्ञानिकों के मान्यता के अनुसार लगभग 15 लाख साल पहले आरंभिक मानव आग जलाना सिख चुके थे ।
आग का इस्तेमाल विशेष रूप से –
- प्रकाश के लिए ।
- माँस भुनने के लिए ।
- खतरनाक जानवरों को दूर भागने के लिए ।
यह भी जाने
( होमो इरेक्टस लोगों ने आग बनाने एवं इस्तेमाल करने की पद्धति का पता लगाया । )
प्रारम्भिक मानव के जीवन मे बदलाव (मध्य पाषाण युग )
जिस प्रकार हम सब के जीवन मे दिन प्रतिदिन बदलाव होते रहते है, इसी तरह आरंभिक मानव के जीवन मे बदलाव या परिवर्तन आते गए ।
पूरापाषाण युग के समाप्त होने पर लगभग 12,000 साल पहले जलवायु गर्म और बरसाती हो गई । इसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों मे घास वाले मैदान बननें लाए तथा जंगली जानवरों की संख्या मे वृद्धि हुआ । इसी युग मे लोग शिकार करते, मछली पकड़ते और भोजन एकत्र को एकत्र किया करते थे । बाद के चरण मे वे पशुपालन भी करने लगे,
यह भी जाने —
भारतीय उपमहाद्वीप मे मध्य प्रदेश के आदमगढ़ और राजस्थान के बगोर मे पशुपालन का सबसे पहला प्रमाण मिलता है । अध्ययन के जरिए यह पता चलता है कि राजस्थान मे लगभग आज से 10000 साल पूर्व राजस्थान मे खेती की शुरुवात का अनुमान लगाया जाता है ।
एक नवीन जीवन शैली ( नव पाषाण युग
मध्यपाषाण युग मे मानव कृषि एवं पशुपालन से परिचित हुआ लेकिन उसका जीवन पूर्ण रूप से स्थायी नही रहा । यद्यपि नव पाषाण युग मे मानव कृषि एवं पशुपालन, औजारों का निर्माण आदि से पूर्ण रूप से जानकर हो गया, परिणामस्वरूप वह अब एक स्थायी जीवन की तरफ अग्रसर होने लगा । वह अब मिट्टी से पके हुए ईटों से घरों को बनाना प्रारंभ कर दिया ।
नव पाषाण युग कीविशेषताएँ –
चूंकि यह काल मानव सभ्यता के विकास का प्रमुख दौर था जिसकी विशेषताएँ – निम्न लिखित है –
- पूरा पाषाण एवं मध्य पाषाण युग मे मनुष्य गुफाओ या नदियों के किनारे रहते थे लेकिन इस युग मे वे अब वे लकड़ी और ईटों के घर बना कर रहने लगे, इससे सामाजिक संगठन का विकास शुरू हुआ ।
- पहले की तरह मानव अब केवल भोजन को इकठ्ठा करने की बजाय खेती करने लगा । इस काल मे मनुष्यों ने सर्वप्रथम गेंहू, जौ, चावल, जैसे आदि फसलों को उगाने लगा ।
- जंगली जानवर गाय, भैस, बकरी, सूअर आदि को पाला जाने लगा , जिससे इन लोगों को दूध, माँस जैसी आवश्यक वस्तुए प्राप्त होने लगी ।
- नवपाषाण युग के लोग पत्थर और हड्डी के औजार के उपयोग के साथ तांबे (Copper) का उपयोग करना भी शुरू किया ।
- वस्तुओ का आदान प्रदान करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हुआ, जैसे – यदि किसी को चावल की जरूरत है वह अन्य किसी व्यक्ति से कोई अन्य वस्तु देकर चावल को ले सकता था ।
नव पाषाण युग के प्रमुख स्थल
मेहरगढ़ – यह स्थल वर्तमान मे पाकिस्तान के एक प्रांत बलूचिस्तान मे स्थित है, यह स्थान भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी कृषि स्थानों मे से एक मानी जाती है ।
मेहरगढ़ से प्राप्त होने वाली प्रमुख वस्तुएं
- अनाज का भंडारण कक्ष
- कच्ची ईटों से बने मकान (जो बताते है की लोग इस स्थान पर स्थायी रूप से रहते थे )
- मिट्टी के बर्तन
- पत्थर एवं तांबे के औजार
बुर्जहोम (वर्तमान – जम्मू कश्मीर )
बगोर (राजस्थान )
कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश )
दोस्तों यह अध्याय “Class 6 History Chapter 2 Notes” मे हमने पढ़ा और जानने का प्रयास किया, आज से 20 लाख साल पूर्व के इतिहास को, जिसमे हमने देखा की प्रारम्भिक मानव शुरुवात मे कहा रहते थे, क्या खाते थे, उसके बाद फिर हमने 10000 साल पूर्व के इतिहास पर नजर डाला की अब मानव काफी हद तक विकसित हो चुका था उसे आग के बारे मे ज्ञात हुआ, पशुपालन और कृषि की नीव भी डाली । अब आता है मानव विकास का सबसे आखिरी चरण जिसे नव पाषाण युग कहते है इसमे मानव पूर्ण रूप से कृषि, पशुपालन, तांबे की वस्तुओ आदि का निर्माण मानव ने सिख लिया ।